STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

3  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

फूल पर लगी धूल

फूल पर लगी धूल

1 min
258

फूल पर लगी हुई धूल को हटाना है

दिल में लगे हुए शूल को मिटाना है

तेरी खुश्बू आज मयखाने में बंद है,

मय के नशे को तुझे आज भूलाना है


जितना तू रोया है ज़माने के सामने

उतना अक्स तोड़ा है आईने के सामने

मुरझाये हुए फूल को फिर से खिलाना है

फूल पर लगी हुई धूल को हटाना है


सब तेरा उपहास कर रहे है,

तू फिर भी मौन है

क्या तेरा अस्तित्व गौण है

उठ खड़ा हो जा साखी,

तुझे अपने अपमान को,

आज खूब रुलाना है


इस फूल को समझ रहे जो भूल हैं

उनके ही केश पकड़कर

तुझे आज मंज़िल तक जाना है

फूल पर लगी हुई धूल को हटाना है



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational