STORYMIRROR

Sana Parveen

Romance

3  

Sana Parveen

Romance

पहरे

पहरे

1 min
237

तुम्हें जिस में ज़माने लग गए....... हैं

वो हम लम्हों में पाने लग गए ......हैं


सभी महफ़िल से जाने लग गए... हैं

ये क्या ग़ज़लें सुनाने लग गए...... हैं


किसी की इक हँसी के वास्ते ....हम

हज़ारों दिल दुखाने लग गए........ हैं


कोई पूछे तो उनसे क्या हुआ .....है

वो क्यूं नजरें चुराने लग गए ......हैं


सो तुमसे बात के चक्कर में ..जाना

कई नम्बर पुराने लग गए ..........हैं


बिछड़ते वक्त रोना चाहिए .......था 

मगर हम मुस्कुराने लग गए....... हैं


तिरे पहरे हैं सब नाकाम .....दुनिया

वो ख्वाबों में आने लग गए........ हैं



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Sana Parveen

पहरे

पहरे

1 min पढ़ें

हसद

हसद

1 min पढ़ें

लम्स

लम्स

1 min पढ़ें

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Romance