Sana Parveen
Tragedy Action
हसद की आग में खूँ दुश्मनों का जलता रहा,
मैं वो चराग हूँ जो आँधियों को खलती रही
कोई तो मेरी खुशी देख कर बहुत खुश था,
किसी के ज़हन में तेज़ाब सी उबलती रही!
पहरे
हसद
लम्स
ग़ज़ल
यहाँ पुलिस वालों ने उसे अनाथ कहकर जला दिया यहाँ पुलिस वालों ने उसे अनाथ कहकर जला दिया
यह रिश्ता टूट ना जाए तभी दूरी बनाना चाहते हैं तुमसे यह रिश्ता टूट ना जाए तभी दूरी बनाना चाहते हैं तुमसे
जिंदगी में बहुत कुछ देख लिया; और अब नया क्या दिखाएगा, जिंदगी में बहुत कुछ देख लिया; और अब नया क्या दिखाएगा,
रिश्तों की समझ होती, तो पहले प्यार की परिभाषा मां- बाप से शुरू होती।। रिश्तों की समझ होती, तो पहले प्यार की परिभाषा मां- बाप से शुरू होती।।
दोस्त से बढ़कर कोई ख़ुदा नहीं। दोस्त से बढ़कर कोई ख़ुदा नहीं।
पढ़ा लिखा होकर भी युवा बेरोजगार है तुम कोई काम के नहीं हो घर, समाज कहता है। पढ़ा लिखा होकर भी युवा बेरोजगार है तुम कोई काम के नहीं हो घर, समाज कहता है।
बाग बगीचे वन निर्जन , संगी साथी, घर आंगन तेरी राह तके । बाग बगीचे वन निर्जन , संगी साथी, घर आंगन तेरी राह तके ।
वहां भला कैसे कायम हो सकता है परस्पर विश्वास वहां भला कैसे कायम हो सकता है परस्पर विश्वास
ईश्क का तार अब टूटा है मेरा, सनम ने साथ छोड़ दिया है मेरा। ईश्क का तार अब टूटा है मेरा, सनम ने साथ छोड़ दिया है मेरा।
अपनी हीं कही बात क्यूँ खुद को क्यूँ पराई सी लगती है। अपनी हीं कही बात क्यूँ खुद को क्यूँ पराई सी लगती है।
मैं ज़िंदगी भर जिसके प्यार को तरसती रही उसने मुझे कभी अपनाया नहीं मैं ज़िंदगी भर जिसके प्यार को तरसती रही उसने मुझे कभी अपनाया नहीं
हर वक़्त आंखों से अश्क़ पिया करते हैं, यूँ ही नहीं तन्हा हम जिया करते हैं। हर वक़्त आंखों से अश्क़ पिया करते हैं, यूँ ही नहीं तन्हा हम जिया करते ह...
करिश्मा होगा कोई न कोई और अनोखी दास्तान बनेगी करिश्मा होगा कोई न कोई और अनोखी दास्तान बनेगी
ये ज़िंदगी है साहब यहा एक दिन मौत को भी अपनाना पड़ता है। ये ज़िंदगी है साहब यहा एक दिन मौत को भी अपनाना पड़ता है।
न कर नफ़रत इतना तुझको सनम, मेरे ईश्क के अरमानो को क्या जाने? न कर नफ़रत इतना तुझको सनम, मेरे ईश्क के अरमानो को क्या जाने?
प्रतिभा का धनी वह जन-जन का प्यारा था, नाम था राजू श्रीवास्तव हास्य कलाकार था वो सबसे। प्रतिभा का धनी वह जन-जन का प्यारा था, नाम था राजू श्रीवास्तव हास्य कलाकार था...
मैं अब मैं न रहा, न जाने कितनों में बट गया हूँ कितने नाम से मैं अब मैं न रहा, न जाने कितनों में बट गया हूँ कितने नाम से
क्या है मेरी पहचान, हर नारी तो परेशान। क्या है मेरी पहचान, हर नारी तो परेशान।
कुछ समझ नहीं पाता हूँ ये सब खेल में कुछ समझ नहीं पाता हूँ ये सब खेल में
क्या पता आगे चलना है, या आगे रहना शौक है उनका क्या पता आगे चलना है, या आगे रहना शौक है उनका