STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Abstract

3  

Mukesh Bissa

Abstract

पहले से ज्यादा

पहले से ज्यादा

1 min
299

जिन्दगी बदली- बदली सी पहले से ज्यादा

निखरने लगी सुबह- शाम से भी ज्यादा


फूल भी महकने लगे हैं पहले से ज्यादा।

 झरने लगी है चाँदनी अब रातों में ज्यादा


गुनगुनाने लगी हैं धड़कनें मधुर गीत ज्यादा

दुनिया अजनबी कम लगती है कल से ज्यादा।


हसीन आँखें छलकने लगी हैं पहले से ज्यादा

सोहबत ने जीना सिखा दिया है पहले से ज्यादा


गिर कर सँभलना सिखा दिया है पहले से ज्यादा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract