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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

फिर तेरी कहानी याद आई

फिर तेरी कहानी याद आई

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फिर तेरी कहानी याद आई, 

मैंने फिर से तुझे कविता बनाई।

फिर से तुझे मैंने अपने शब्दों में पिरोया ,

फिर से तेरी याद में अपनी पलकों को भिंगोया।

फिर से तेरा रूप मैंने अपने दिल में सजाई ,

अपनी अल्फ़ाजों से श्रृंगार किया तेरा फिर एक बार ।

मैंने फिर से तेरी वह मधुर मुस्कान तेरी होठों का अपनी होठों से मुस्कुराई।

मैंने फिर से अपनी दिल में तेरी छपे तस्वीर को बार- बार दुहराई, 

एक तू ही तो है वो मेरी दिल- रुबाई ,

जिसके छांव तले मैं सूनेपन में भी सुकून-ए- आशियां है पाई ।

मैंने फिर से अपनी अल्फ़ाजों में तेरी आवाज़ को एकाकी में भी महफिल लगाकर है गुनगुनाई।

हाँ ! फिर से तेरी कहानी याद आई। 

मैंने फिर से तुझे अपनी कविता बनाई। 

गीत बनाया तुझे ही ,

मेरी गज़लों में फिर से तु है आई ।

इस शायर की नायाब शायरी है तु ,

शरारत तेरी फिर से मुझे याद आई ।

मैंने फिर से वही नटखट अंदाज तेरी निश्छल प्रेम में भी पाई ।

मैंने फिर से वह न्यारी नटखट परी को अपनी दिल में छुपाई।

तू मुझे जब - जब याद है आई ,

मैं तुझमें समाकर तेरी यादों को चुराकर, 

बिताये गए संग साथ लम्हों को फिर से मैंने अपनी कविता में है गाई।

फिर तेरी कहानी याद आई ।।

 


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