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Stuti Singh

Abstract Tragedy

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Stuti Singh

Abstract Tragedy

फिर क्या होगा?

फिर क्या होगा?

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ढल गयी उम्र तो नई उमंगों का क्या होगा,

सुख गयी शाक तो बारिश का क्या होगा!

वक़्त रुकता नहीं एक पल भी किसी के लिये,

गर कभी थम जाए तो फिर क्या होगा?

बन संभाल के कली फूल बनने को चली,

राह में तूफ़ान आ जाये तो फिर क्या होगा!?


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