STORYMIRROR

AJAY YADAV

Inspirational

4  

AJAY YADAV

Inspirational

पेड़ धरा का भूषण

पेड़ धरा का भूषण

1 min
298

पेड़ काट तुमने जग में 

कितनों का बसेरा छीन लिया

 झीलों में डाल के कूड़ा कचरा

 पानी में भी विश घोल दिया 

ये मूक जीव कुछ ना कहते

 अपनी दुनिया में खुश रहते 

ना कभी मांगते कुछ तुमसे

 पर कर्म तुम्हारे सब सहते

 ना चैन मिले जो जाओ कहीं 

भीषण गर्मी पर छांव नहीं 

पानी भी बिकता बोतल में

 बहता पानी भी साफ नहीं

 घुल रहा जहर हवाओं में

 लेना सांस भी मुश्किल है

 दोष किसी को दे हम क्या

 हम सब भी इसमें शामिल हैं

 कब सुधरेगा तू ए मानव

 दूजे की फिक्र करेगा तू

 अपने लाभ की ही खातिर

 कितनों के प्राण हरेगा तू 

यह फर्ज निभा लो तुम अपना 

बचा लो यह पर्यावरण अपना 

वादियां रंगीन फिजाएं कहीं 

बनकर रह जाए ना कोई सपना

 प्रण ले आज सभी मिलकर 

इस जहर को रोकना होगा

 हो साफ धरा पानी व हवा 

सभी को वृक्ष रोपना होगा

 जन्म दिवस और त्योहारों की खुशियां

 इस तरह मनाए हम

 देकर इस प्रकृति को जीवन

 मिलकर दस पेड़ लगाए हम।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational