STORYMIRROR

AJAY YADAV

Inspirational

4  

AJAY YADAV

Inspirational

पहचान कैसे हो अब इंसान की

पहचान कैसे हो अब इंसान की

1 min
309

पहचान कैसे हो अब इंसान की 

जब चेहरों पर चेहरे छिपे हो अपने अभिमान की 


निकलती है इनके मुंह से सिर्फ मीठी बोलियां 

लगता है वे नजदीक है मगर बढ़ाते हैं अपनों से दूरियां 


अब तो अपने ही चेहरे पर भरोसा नहीं होता है

 कैसे कर लूं तुम पर जब अपना ही धोखा देता है


काश मुखौटा भी एक मर्ज होता !

मिलती दवा बाजार में खाकर जिसे इंसान सतर्क रहता


अब तो अपने भी पराए लगते हैं 

किस से कहें

हाल-ए-दिल सब खुदगर्जी में नहाए बैठे हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational