STORYMIRROR

Reetu Singh Rawat

Abstract

2  

Reetu Singh Rawat

Abstract

पागल

पागल

1 min
2.7K

याद है

वो दिन जब तू भागा-भागा आया था

मुझे देखकर तू खुशी से मुस्कराया था।

तेरी हंसी में मैं खो गई थी

जीवन का आनंद आने लगा था

तू मुझे पागल बनाने लगा था।

तेरी हर बात समझ आने लगी थी।

मैं मौन थी अंजान नहीं।


ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi poem from Abstract