STORYMIRROR

अमोल धों सुर्यवंशी

Romance

2  

अमोल धों सुर्यवंशी

Romance

पागल

पागल

1 min
157

रोका हर बार उसको 

मरे करीब आने से 

वो इतना करीब आयी 

तोड़ के रिश्ता मेरा दिल में लिपट गयी 

वो दिन खुशी का था 

वो जखम दे गया 

गम को कलजे में रखे 

मैं आंसू पी के रोया 

छोडने के लिए उसके पास बहाना था

मरे लिए तो वही सारा था 

ये होता हे जब सब निछावर कर दो तो 

हम इशक किये थे भूल ना पायेंगे मर मिटे ही तो 

साला ये दुनिया पागल हे जो दिमाग की ना 

सुने तो.......  



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance