Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

अमोल धों सुर्यवंशी

Romance

2.5  

अमोल धों सुर्यवंशी

Romance

महफ़िल में तेरे

महफ़िल में तेरे

1 min
197


ना तेरी चाहत रही

ना मेरी मोहब्बत सही

तेरे मन में नफ़रत की

आग जलती रही

गर्दिश में बिखर जाऐ

ऐसा मेरा गीत नहीं

तेरे महफ़िल से

जनाज़ा उठे मेरा

ना कम होगी ये मेरी प्रित

ना होगी तेरी कभी जीत

रग रग मे दर्द से वाकिफ़ हूँ

में बेवफा कैसे कहूं

दिल में धड़कती रहे

 दर्द दे के तू सभी

ना छोडू तूझे

पाने के लिऐ

ना पाऊं तूझे जताने

के लिऐ.

आंसू ये नहीं है झूठे

तेरे लिऐ ही बहीते रहै

प्यार मेरा है उसमें

जो अकेले घूट-घूट रोये

ना बिखरे तू मुझे

खोने के बाद

तोबा जिंदगी

कम्बख्त है

दिल का गुलाम बना के

हजारो बहाने किये तूझे

भूलाने के तू याद आती रही

मुझे सताने के लिऐ

गर्दिश में बिखर जाऐ

ये मेरा गीत नहीं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance