ओस की बूंदे
ओस की बूंदे
सुबह की पहली नरम किरण जब
पत्तों पर सहलाती है
हरी घास की मखमली चादर
मोती से सज जाती है
ठंडी हवा की धीमी झोंके
जब चुपके से आते हैं
फूलो के उन पंखुड़ियां पर
अपना प्यार लुटाते हैं
क्षण भर का इसका जीवन
सूरज के तपिश डराती है
पर अपनी छोटी हस्ती से
यह जग को महका जाती है
जैसे कोई सुंदर सपना
आंखों में बस जाती है
यह ओस की नन्ही बूंदे भी
मन को खुश कर जाती है
