जीवन का सत्य
जीवन का सत्य
हवा पानी और भोजन है
वस्त्रों का भी साथ है
ईश्वर की इस सुंदर रचना में
हिम्मत हर हाथ है
फिर भी क्या इंसान है यहां
मन से इतना हारा है
सुख के साधन सब पास मगर
दुःख का ही सहारा है
हिम्मत दी है ईश्वर ने
हर मुश्किल से लड़ने को
फिर क्योंकठिन लगता है
जीवन आगे कदम बढ़ाने को
सब कुछ पाकर जो खुश नहीं
वही सबसे बड़ी बाधा है
जीवन जीना सरल है बहुत
बस मन का भ्रम यह ज्यादा
दूसरों पर दोष मढ़कर
कब तक खुद को छोलोगे तुम
अपनी गलतियों को पहचाने जरा
तभी तो आगे बढ़ोगे तुम
निर्भरता कि बेरिया तोड़ो
खुद को अपनी राह के रही बनो
सफलता की सहेली फिर मिलेगी
बस अपने मन के तुम साही बनो
