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varsha thakur

Fantasy Others

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varsha thakur

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संघर्ष :एक पुरुष

संघर्ष :एक पुरुष

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संघर्षों की तपिश में जलकर 
जो शीतल छाया बनता है।
कंधों पर अपनो की खुशियां 
और जिम्मेदारियां ढोता होता है।

कभी पिता की डांट में छुपा
कभी भाई की मस्ती है।
वह हार मान कर भी हंसता है।
जिनकी दुनिया कश्ती है।

भीतर समदर् जज्बातो का
पर चेहरे के ठहराव के लिए 
चलता जाता मुश्किल पथ पर 
मन में नए पड़ाव लिए 

वह पत्थर सा मजबूत भी है।
और मोम सा पिघलता है।
पुरुष वही जो हर रिश्ते को
बड़े मान से बुनता  है।


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