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Dr Vivek Madhukar

Abstract


4.7  

Dr Vivek Madhukar

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ओ प्यारे बेटे हमारे

ओ प्यारे बेटे हमारे

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एक दिन ऐसा होगा

पंख लग जाएँगे पैरों को तुम्हारे,

उड़ने लगोगे निस्सीम में,

रूबरू होगे तब तुम जीवन की वास्तविकताओं से,

देख पाओगे ऐसे जैसे देखा नहीं जीवन को कभी।


दुनिया ओछी है, अति मलिन, मेरे बेटे

पर तुम बना सकते हो उसे बेहतर।

झुकना नहीं, दबना नहीं,

हर ओर है नकारात्मकता का साम्राज्य,

भर कर फेफड़ों में ताज़ी हवा उड़ चलना ऊपर,

और दिखा देना ज़माने को कैसे बना जाता है सर्वोत्कृष्ट।


और यह याद रखना सदा

चाहे कुछ भी करो, कहीं भी रहो तुम

हमारे लिए तुम हो “नंबर वन”।


नहीं जानते हम कि कह सकते हम

आदर्श माता-पिता अपने आप को,

बस इतना जानते है,

पुकार सकते तुम्हें अपना पुत्र,

वो बेटा जो चमत्कृत करता है हमें दिनानुदिन।


हम दोनों ये भी नहीं जानते कि क्या सचमुच

पाया हमने वो सब कुछ जो चाहा था,

पर सारी कमियाँ, हमारी सारी अपूर्ण इच्छाएँ

खो जाती हैं तुम्हारे प्रेम के आलोक में।


मुस्कुराते हो तुम, खिल जाता है इन्द्रधनुष तुम्हारी मम्मी के चेहरे पर,

हँसते-खिलखिलाते हो तुम, पिघल जाता है आनंद से मेरा दिल,

रोते हो तुम, आ जाता है कलेजा मुंह में तुम्हारी मम्मी का,

उदास होते हो तुम, डूबने लगता है दिल मेरा।


इतने बेशकीमती हो तुम हमारे लिए, प्यारे बेटू

हमारे जीवन में तुम्हारी मौजूदगी, कोई जोड़ नहीं इसका,

कल्पना भी नहीं कर सकते तुम

क्या अहमियत है तुम्हारी

मेरे और तुम्हारी मम्मी के लिए।


कितने खुशनसीब हैं हम दोनों,

कितना समृद्ध कर दिया है तुमने हम दोनों के जीवन को

कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकते तुम कभी,

बस इतना कह सकता हूँ मैं

भाग्यवान हैं हम, पाया हमने पुत्र तुझ जैसा।


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