STORYMIRROR

Leena Kheria

Abstract

3  

Leena Kheria

Abstract

नया सवेरा..

नया सवेरा..

1 min
267

अँधेरे सारे परास्त हुये

जग चला उजालों की ओर

निशा भी अब छटने लगी

बस होने वाली है भोर


आशाओं की किरणें फैलीं 

अब खिलेगें खुशियों के फूल

प्रिय अप्रिय जो घटित हुआ

सब उसको जाओ भूल


लेकर आया है ये सवेरा

जीवन में एक नयी उमंग

कलरव कर रहे विहग सभी

जैसे बज रहा कोई जल तरंग


प्रस्फूटित हो रही नन्ही कलियॉं

पुष्पित हो रहा सारा चमन

चहुँ ओर बिखरा उजियारा

पल्लवित हो रहा हर मन


फैली आभा तंद्रा टूटी 

जीवन का जग झूला झूले

चरितार्थ हो रहा है मानो

बीती रात कमल दल फूले।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract