नवरात्रि
नवरात्रि
दौड़ी उमंग की लहर, आया गरबे का प्रहर।
झूमो झूमो रे , झूमो झूमो रे ।
पायल के घुंघरू बोले, कंगन की खन-खन बोले।
नाचो नाचो रे नाचो नाचो रे ।
माथे की रखड़ी भी गरबा के बोल बोले।
झूमो झूमो रे, झूमो झूमो रे ।
नवरात्रि आई, गरबा कर लो रे।
झूमो झूमो रे, झूमो झूमो रे।
गरबे में झूम लो, अंबे को पूज लो।
देवी की ऊर्जा फैली, नवरात्रि में झूम लो।
दिव्यता जगाने को, नौरात्रि मनाने को ।
गर्भदीप पूज लो, गरबे में झूम लो।
गरबा कर लो रे, गरबा कर लो गरबा कर लो रे।
डांडिया रास है, नवदुर्गा का वास है ।
नौ दिन की पूजा है, पूजा यह खास है।
चनिया चोली में सज रहे, केडिया में जँच रहे।
लोक नृत्य की धूम है, गरबे में झूम रहे।
देवी की ऊर्जा है, दिव्यता का वास है ।
गर्भदीप के आलोक में, मिट रहे त्रास है।
अंतर्मन की शुद्धता, नौ दिन का प्रताप है।
दिन-रात के जाप में, चल रही शुद्ध श्वास है।
