Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Himanshu Sharma

Abstract

4  

Himanshu Sharma

Abstract

'नॉटी' गज़ल

'नॉटी' गज़ल

1 min
174


शिक्षा के गाल पर सामर्थ्य की चिकोटी है,

नेताओं की हरामखोरी भी बहुत 'नॉटी' है !


अपनों को भी चूना लगाना, एक कला है,

कई में है कुव्वत बड़ी, अपनी तो छोटी है !


लोगों का पेट न भरता कफ़न खाने के बाद,

अपनी तो भूख मिटाती, अनाज की रोटी है !


बड़े नवाबियत से चलते हैं उनके साहबज़ादे,

जानते हैं सियासती ताक़त उनकी बपौती है !


दंगा, लूट, ख़ून, आगज़नी, कटी हैं ये फसलें,

जो नेताओं ने सियासती ज़मीन पर जोती है !


हमने देखें चेहरे सियासतदानों के मुस्काते हुए,

क़ायम चहरे पे हँसी रखने को हुक़ूक़ रोती है !


भूखे रहते हुए मुस्कुराना सीख गए हैं अब हम,

भूख लगने लगी हमको बड़ी और मौत छोटी है !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract