STORYMIRROR

Manju Anand

Abstract

4  

Manju Anand

Abstract

नंन्ही बिटिया

नंन्ही बिटिया

1 min
254

जब नंन्ही बिटिया घर में आई,

किलकारी गूंजी घर में

गूंज उठी जैसे शहनाई।

चाँद सरीखा चेहरा उसका,

लाल कपोल, मस्तक विशाल,

बढ़े-बढ़े कजरारे नैना,

देख-देख सब हुए निहाल।

बिटिया जब तनिक मुस्काई,

घर खुशियों भरी दीवाली आई।

बेटी होती लक्ष्मी का रुप,

आज लक्ष्मी घर हमारे आई,

जब नंन्ही बिटिया घर में आई।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract