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Neeraj pal

Inspirational

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Neeraj pal

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निष्काम भक्ति

निष्काम भक्ति

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स्वार्थ वश जो गुरु को भजे ,करता जो मन की चाह।

 वह सेवा नहीं पाखंड है, कठिन है जीवन की राह ।।


फल की चिंता जो ना करै, लगा रहे दिन रात ।

परम सुख उसको मिलै, काल करे नहीं घात।।


 गुरू तो करते सब पर कृपा, जो माँगे सब होय।

 सेवा से सब कुछ सुलभ है, गुरु सम उसका न कोय ।।


गुरु उपदेश पर जो न चले, भव -रोग ग्रसित वह होय।

 कहीं ठिकाना उसको न मिले, दु:ख दर्द में ही रोय ।।


गुरु -आज्ञा शिरोधार्य कर, काटै जो जीवन काल।

 अभय, अमर वर उसको मिलै ,हो जाए माला माल।।


 भोग, मोक्ष की चाह नहीं, भक्ति करता "निष्काम"। 

ध्रुव पद का भागी बनता, न सूझै सुबह और शाम।।


 सद्गुरु नाम जिसको मिलै, समझो उसको धनवान।

"नीरज" काम, अर्थ को छोड़ तू , गुरु ही तेरे भगवान।।


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