STORYMIRROR

निशां

निशां

1 min
718


तुम्हे ढूढ़ते हुए

जिस भी जगह

पहुंचती हूँ,

पता चलता है

सालों पहले

तुम आए थे,


लेकर तुम्हारे

बचे हुए निशां

लौट जाया करती हूँ,


जाने कब तक

सहेज पाऊँगी इन्हें


जो मिले तुम तो

तुम्हें ही लौटा दूँ इनको।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance