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Kavi Yash kumar

Abstract

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Kavi Yash kumar

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निर्णय

निर्णय

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फिर पीछे हटना है

या साहस कर डटना है ,

थका हूँ पर हारा नहीं

अभी तो मुझको लड़ना है।

कब तक ऐसे सहता रहूँ मैं

अब मुझे भी हिम्मत जुटानी होगी,

कहते थे बापू प्रेम करो अपने शत्रु से

पर अब तो उनको धूल चटानी होगी।

या करते रहनी है ग़ुलामी उनकी

या खुद उन्हें ग़ुलाम बनाना है ,

यह मेरा जीवन है,

निर्णय तो मुझे ही करना है।


बैठूंगा किसी सड़क किनारे

हाथ मे थामे भिक्षा पात्र,

या खानी है मेहनत की रोटी,

भूल भाल कर अपना स्वार्थ।

किसी के टुकड़ो पर जीना होगा

या खुद ही एक मालिक बनना है,

किस्मत पर निर्भर रहना है मुझे

या खुद की किस्मत गढ़ना है।

या आलस कर जीना है

या श्रम के विष को पीना है ,

यह मेरा जीवन है,

निर्णय तो मुझे ही करना है।


पिंजरे मे ही जीना मुझको

पिंजरे मे मर जाना है,

देखके निर्दयी दुनिया को

मेरा यही बहाना है।

कही मर ना जाऊ मैं गगन मे कही

किसी बलशाली के पंजे मे आकर,

या आलस्य कर विश्राम करू

मैं अपना नीड़ सजाकर।

या तो गगन मे उड़ना है

या इस संसार से डरना है,

यह मेरा जीवन है,

निर्णय तो मुझे ही करना है।


क्या हूँ मैं और क्या कर सकता हूँ

इस दुनिया को यह बात बतानी है,

या किसी की परछाई बनना है

या खुद की पहचान बनानी है।

मैं धन का लालच नहीं रखता,

मुझे तो बस यश (प्रशिद्धि ) प्राप्त करना है,

जीना है मुझे अपने तरीके से

अपने अहंकार को समाप्त करना है।

किसी और पर नहीं,

मुझे खुद पर भरोसा करना है,

यह मेरा जीवन है

निर्णय तो मुझे ही करना है।



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