निमेष निवारिणी
निमेष निवारिणी
या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्री.
सर्वशक्ति कालिका कराल रक्त दंतिका।
शांभवी सुधा सती सुगम्य चंद्रघंटिका।।
चंद्रिका सुबोधिनी गदा त्रिशूल धारिणी।
हस्त शंख चक्र ले निशुंभ शुंभ तारिणी।।
हे अजा सिता अगम्य मातु हे पताकिनी।
दुर्गमा त्रिलोचनी विशाल दैत्य नाशिनी।।
शारदे सँवार दे अबोध माम् तूलिका।
ज्ञान के विहान से प्रकाशवान मूलिका।।
दुष्ट शत्रु वंश बेल हारिणी कपालिनी।
अट्टहास कालिका कुमारि मुण्डमालिनी।।
धूप दीप आरती जुहार विंध्यवासिनी।
विश्व वंदिता नमस्तु मातु सिंहवाहिनी।।
रोग शोक कष्ट माँ निमेष में निवारिणी।
शूल चक्र संग आप दिव्यता प्रसारिणी।।
पद्म हस्त में लिए पधार दुर्गनाशिनी।
नित्य चंद्रिका भजे दयालु दुर्गसाधिनी।।
