STORYMIRROR

Ranjeet Jha

Abstract

3  

Ranjeet Jha

Abstract

नींद

नींद

1 min
363

नींद

आज दिखा दी मैंने

नींद को आंख

खोलकर बैठ गया

लैपटॉप, कम्प्युटर और मोबाइल

टी.वी. भी खोल दिया


देखता हूं कब तक नही आती है

नींद 

तू ज़रूरी नहीं

तेरा सौदा कर दिया हमने

क्रेडिट कार्ड और होम लोन से

जिसके लिए 


सुबह उठाना

ऑफिस जाना

काम करना

स्कूल कि फीस

घर का राशन 

तू आये 

ना आये

क्या फर्क पड़ता है ?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract