नील की सीख
नील की सीख
पेड़ों को काटकर घर मत बना,
गाँव गाँव हैं उसे शहर मत बना,
मजबूर अपने से नफरत खातिर,
किसी को जीवन भर मत बना।
नदी का रास्ता बस बरसात तक,
जिंदगी के दिन केवल सात तक,
कोई किसी़ का रह सकता हैं तो,
केवल उसके विश्वासघात तक।
बरसात जानें से बारिश का गम,
उपलब्धि पाकर सिफारिश का गम,
क्यों और कोई मौका दे तुम्हें जब,
सहना पड़ता हो गुजारिश का गम।
फूलों को तोड़ कर जो खुश होगा,
मेरे से मुँह मोड़ कर तो खुश होगा,
खाते रहे धोखा पीठ पीछे तो कैसे,
रिश्ते को जोड़ कर वो खुश होगा।
नदी का बाढ़ रोक लिया लगता हैं,
रो कर अभी शोक किया लगता हैं,
हम तो बढ़ गये मगर गिराने में वह,
पूरी ताकत ही झोंक दिया लगता हैं।
