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Amogh Agrawal

Inspirational

4.6  

Amogh Agrawal

Inspirational

नारी की पहचान

नारी की पहचान

1 min
325


ठंड सी ठिठुरती हूँ 

मोम सी पिघलती हूँ

बारिश की बूंदों सी बरसती हूँ 

तो मैं एक नारी की पहचान हूँ


लेकर पर्वतों का रूप 

गम के मेघों को रोक 

स्वयं पर बरसाती हूँ 

तो मैं एक नारी की पहचान हूँ


हवा सा मन है मेरा 

अम्बर सा आँचल फैला 

धरा की जटिलता रखती हूँ

तो मैं एक नारी की पहचान हूँ


सागर से गहरे भाव मेरे 

लहरों सी मुदित होकर 

खुशियों के मोती देती हूँ

तो मैं एक नारी की पहचान हूँ


मेघ - बादल 

जटिलता - 

मुदित - delighted मगन, मस्त 



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