नारी जागरूकता....!
नारी जागरूकता....!
सड़कों पर चीरहरण होता है
बेटियों का मरण होता है
अभी भी है दुर्योधन दुशासन
अभी भी है अधर्मी में शासन
बेटियों को अब द्रौपदी नहीं काली बनना है
क्योंकि
बचाने के लिए अब श्याम नहीं है
अब इस धरती पर कोई राम नहीं है
खुद में भर लें बेटियां इतनी ताकत
स्वयं ही कर लें स्वयं की हिफाजत
तोड़ दे स्त्री ये बारीक बेड़ियां
जैसे जीते हैं बेटे वैसे जिएं अब हर घर में बेटियां
बेटियां रहें सुरक्षित प्रत्येक माता-पिता को कानून से बस ये ही आशा है
सवाल उठाओ सब मिलकर
खुले घूम रहे हैं जो दरिंदे
क्या ये ही न्याय की परिभाषा है
आखिर इनको कुकर्मों का उत्तरदाई कौन है
अपराधी तो हम भी हैं
कुछ दिन कैंडल्स जलाकर
स्टेटस लगाकर
फिर क्यों हो जाता है ये सिस्टम मौन हैं
बेटियों की आबरू जब सड़कों पर तार-तार होती है
तब इंसानियत भी शर्मसार होती है
अब फिर से ना कोई आसिफा,दामिनी, जैनब हो
अब ना कोई ना निर्भया हो
बस इस समाज में सुरक्षित बेटियां हों
समाज उन बच्चियों को उस नजर से देखता है
जैसे कि गलत उनके साथ नहीं हुआ
उन्होंने किया है
संकुचित मानसिकता को छोड़ो यारों
बेटियों के लिए है क्यों ये नजरिया है
समाज में जागरूकता लानी होगी
सिर्फ बातें करनी नहीं है
हमें वो बातें निभानी होगीं
हमने अपनी संस्कृति और हिंदुत्व को अपनाना है
मिलकर हमें फिर से सुरक्षित और अनुपम भारत बनाना है
अब इतिहास फिर न दोहराए खुद को
अब फिर ना किसी बच्ची की अखबार के पन्नों में दर्ज कहानी हो
काश ये सिर्फ़ ज्योति कि नहीं
पूरे हिंदुस्तान की जुबानी हो !!!!
