STORYMIRROR

Hemant Soni

Romance

3  

Hemant Soni

Romance

नाराज़गी

नाराज़गी

1 min
235

नाराज़गी तुमसे मेरी

पिछले गिले हम भी भूले नहीं

सामने तुम आए हो 

जाने क्यूँ घबराए हो। 


कह दो बातें सुनना चाहे 

दिल यह जो मेरा 

कैसी यह ख़ामोशी है 

बातों ही बातों में भी 

कह दो बातें सुनना चाहे। 


दिल यह जो मेरा

बेरुख़ी क्यूँ तुझमें रही

दीवानगी मुझको मिली नहीं

कैसी दिल की बातें हैं। 


जाने कैसी रातें हैं 

मिलती नहीं सौग़ातें हैं

मिलती नहीं मुलाक़ातें हैं 

बेताबी क्यूँ बढ़ती रही 

बढ़ती रही तुमसे नाराज़गी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance