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Mahendra Kumar Pradhan

Abstract

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Mahendra Kumar Pradhan

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मुस्कुराहट के फूल

मुस्कुराहट के फूल

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बड़ी तकलीफ़ से उभरी है

हालात की मार से ,

कुछ हल्केपन का अनुभव

हुआ रिश्तों की भार से ।


दम घुटते पिंजरे से

बड़ी कठिनाई से मुकली हैं

अपनों से खाई चोटों को

बड़ी मुश्किल से भूली हैं।


तब जाकर उन होठों पर

खुशी के फूल खिले हैं ,

एक को मुस्कान नसीब हुआ

तो दूसरे को हंसी मिले हैं ।


जीवन में अनमोल हैं

हैं आरोग्य निधि के मूल ,

खुशियों के गुल खिलाते हैं

ये मुस्कुराहट के फूल ।



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