मुस्कुराहट के फूल
मुस्कुराहट के फूल
बड़ी तकलीफ़ से उभरी है
हालात की मार से ,
कुछ हल्केपन का अनुभव
हुआ रिश्तों की भार से ।
दम घुटते पिंजरे से
बड़ी कठिनाई से मुकली हैं
अपनों से खाई चोटों को
बड़ी मुश्किल से भूली हैं।
तब जाकर उन होठों पर
खुशी के फूल खिले हैं ,
एक को मुस्कान नसीब हुआ
तो दूसरे को हंसी मिले हैं ।
जीवन में अनमोल हैं
हैं आरोग्य निधि के मूल ,
खुशियों के गुल खिलाते हैं
ये मुस्कुराहट के फूल ।
