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मुक्तक

मुक्तक

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छलकते जाम होंठों के,

तुम्हारे नाम कर दूँगी।

तुम आओ तो बाहों में,

हँसी हर शाम कर दूँगी।


भूलकर भी तुम हमें,

कभी भी भुला न पाओगे।

तेरे प्यार में सनम,

मैं ऐसा काम कर दूँगी।


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