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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance

मुक्तक : फिसलता समय

मुक्तक : फिसलता समय

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हम तुम दोनों जब साथ साथ होते हैं

तब खूबसूरत दिल के जजबात होते हैं 

रेत की तरह फिसलता रहता है समय 

कदमों में अपने सारे कायनात होते हैं 


मेरी धडकनों में तेरा ही तराना रहता है

इन लबों पर बस तेरा अफसाना रहता है 

हम तुम दोनों बने हैं एक दूजे के लिए ही

ये मैं और तू नहीं सारा जमाना कहता है. 



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