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Phool Singh

Inspirational

4  

Phool Singh

Inspirational

मोहनदास करमचंद गाँधी

मोहनदास करमचंद गाँधी

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देश को समर्पित अंतिम सांस तक

ऐसा व्यक्तित्व पाए 

देश-विदेश में डंका बजता

2 अक्टूबर को दुनियाँ में आए।।


करमचंद्र गाँधी पिता थे जिनके 

लाड़ले पुतलीबाई कहलाये

शिक्षा पाते इलाहाबाद से 

कर लंदन से वकालत आए।।


कस्तूरबा गाँधी से विवाह हुआ

जिनसे पिता सुख थे पाए 

जीवन संघर्ष में बनी संगनी

जो अंत तक साथ निभाए।।


दक्षिण अफ्रीका में नौकरी पकड़ी

जहाँ नस्लीय भेद थे पाए 

धक्के देकर गए निकाले 

अश्वेत वहां कहलाए।।


प्रतिबंधित था जहां यात्रा करना

टिकट अश्वेत चाहे फर्स्ट क्लास का लाए

आहत हुए थे गाँधी जी इससे

फिर भारत लौटकर आए।।


राजनीतिक गुरू गोखले जिनके 

उनको इसमे लाए

दिशा दिखाई पूर्ण आजादी की

नब्ज़ देश की दिए समझाए।।


भारत भ्रमण की योजना बनाकर 

हर क्षेत्र में जाकर आए 

आंदोलन बचा एकमात्र रास्ता

संग अहिंसा धर्म अपनाए।।


विरोध किया सदा भेदभाव का 

भूमि कर पर रोक लगवाए 

अधिकार दिलवाया नारी समाज को 

कार्यक्रम अस्पृश्यता के विरूद्ध चलाए।।


गरीब किसानों की मांग को रखते

जमींदारो के विरोध में आए

चंपारण सत्याग्रह देश चलाकर

हक किसान का वही दिलाए।।


उत्पीड़न किया जब सरकार ने 

तब खेड़ा सत्याग्रह चलाए

कर गरीब किसान का माफ कराकर 

रिहा जेल से उन्हें कराए।।


बोनस दिलाया मजदूरों को 

जब मजदूर आंदोलन चलाए

लोकप्रियता उनकी इससे बढ़ गई 

अंग्रेज सरकार की नींद उड़ाए।।


सम्मान-मैडल सब वापस करते 

मुख्य प्रवक्ता बनकर आएं

मुस्लिमों का, अंग्रेजों के प्रति रोष बढ़ा था 

खिलाफत आन्दोलन मिलकर सब चलाए।।


स्वराज की प्राप्ति मुख्य लक्ष्य

आंदोलन खूब चलाए

लवण कर का विरोध किया तो

अंग्रेजों की नीव हिलाए।।


बहिष्कार कर विदेशी समान का

देशी वस्तु उपयोग में लाए 

नरम दल के नेता कहलाते

सदा सत्य-अहिंसा का मार्ग अपनाए।।


शाकाहारी वो भोजन करते

व्रत-उपवास का महत्व बताए

धोती सूत की पहने हमेशा

चरखा रोज चलाए।।


असहयोग कभी चौरी-चौरा 

आंदोलन स्वराज चलाए 

बॉस-नेहरू की सहायता लेकर

अंग्रेजों की नींद उड़ाए।।


आंदोलन बड़ा था भारत छोड़ो

व्यापक रूप चलाए 

करों या मरों का नारा देते

शख्त रवैया सरकार अपनाएं।।


द्वितीय विश्व युद्ध में सहायता देकर

सरकार को खूब लुभाए

अग्रेंजो की सत्ता हिला दी उन्होंने

जब आक्रामक होकर इसे बढ़ाए।।


भारत-विभाजन कलंक बड़ा एक 

उसको शीश लगाए 

थी, पूर्ण आजादी उन्हें चाहिए

जो सर्वस्व अपना लुटाए।।


शीश झुकाते बड़े-बड़े नेता

वो सादगी सदा अपनाए 

हिल्टर-मुसौलिनी कांपते जिनसे 

देश, अहिंसा से आजाद कराए।।


शांति दूत था ईश्वर का जो 

बापू भी कहलाए 

महात्मा कहते टैगोर जी उनको

जो देश का मान बढ़ाए।।


नेताजी भी राष्ट्रपिता कहकर 

आशीर्वाद थे उनसे पाए 

आत्मशुद्धि के लिए उपवास थे करते

जो सहिष्णु धर्म अपनाए।।


कट्टरपंथी हिंदू एक

नाथूराम गौड़से जो कहलाए

गोली मारकर उनकी हत्या करते 

दोषी जो उन्हें भारत-विभाजन का ठहराए।।


"हे राम" शब्द था अंतिम उनका

मृत्यु के समय जो आए 

भवपार उतारते राम ही उनको

जिनके ये नाम जुबां पर आए।।


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