मोहन
मोहन
निवेदन यही है बारंबार तुमसे कोई भूल हो तो क्षमा कर देना।
भूल से अगर भूल जाऊं कुछ तो मोहन माफ़ कर देना।
रहना नहीं है महल, दुमहले, तुमको बस ये ही कहना चाहती हूं।
चरणों में मिल जाए शरण मुझे चरणों के पास रख लेना।
कान्हा तुमसे अरज यही है, दिल कभी किसी का ना मैं दुखाऊं।
भटक भी जाऊं अगर कभी तो सत्य की राह दिखा देना।
राधा बनने की चाह नहीं है, ना मीरा सी सहनशीलता।
कभी कभी तुम आकर मोहन, वरद हस्त सर पर रख देना।
आस तुम्हीं से, विश्वास तुम्हीं पर, कण कण में है वास तुम्हारा।
आसरा है बस तुम्हारा मुझको, विश्वास मेरा बनाए रखना।
