STORYMIRROR

Rutuja Mahajan

Abstract Fantasy Inspirational

3  

Rutuja Mahajan

Abstract Fantasy Inspirational

मंजिल...

मंजिल...

1 min
286

रास्ते के हर एक मोड़

पे मंजिल का नाम लिखा है,

जब कोशिशे होन्गी कामियाब

तब आराम ही आराम लिखा है...


कामयाबी के हर एक

सीढी को अब जल्दी से जल्दी 

पार करना है,

अपने सपनों को सच कर

तक़्दीर से दीदार करना है...


मैं हूँ पंछी इस खुले 

आसमान की,

अब बड़ी उड़ान भरनी है।


अपने सपनो की हर एक 

मंजिल से अब दोस्ती करणी है..


नहीं घबराना किसी भी मुश्किल से

अब डट के खड़े रहना है,


जब होंगे दम पे कामयाब 

तब आसमान से चिल्लाकर

कहना है...


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract