मंजिल अब दूर नहीं
मंजिल अब दूर नहीं
कैसा है ये अपना जीवन सनम,
तुम मुझे कभी समजती ही नहीं,
मै तो हमेशा आगे चलता रहता हूं,
तुम कभी साथ चलती ही नहीं।
ख्वाब सब हमारा पूरा करना है,
तुम मुझे उत्साह दिखाती ही नहीं,
अकेला सोचकर मै थक गया हूं,
तुम कभी आगे बढती ही नहीं।
मन की बात मै तुमको करता हूं,
तुम कभी मुझे सूनती ही नहीं,
मज़बूर बनकर मै बैठा रहता हूं,
तुम होंसला दिखाती ही नहीं।
कुछ कदम मै तो चल ही रहा हूं,
तुम मंजिल की ओर बढती ही नहीं,
कुछ कदम तुम भी चलो तो "मुरली",
मंजिल भी अब इतनी दूर है नहीं।
