STORYMIRROR

S Ram Verma

Abstract

3  

S Ram Verma

Abstract

मनः कृष्णा !

मनः कृष्णा !

1 min
199


मन ही तो कृष्ण है 

मन ही तो श्याम है

तब ही तो मन चंचल है 

तब ही तो मन अधीर है

वो कहाँ कभी किसी के  

कहने पर ठहरता है

कहाँ किसी के बुलावे  

पर वो साथ चलता है  

वो तो हमारी सांस के 

संग संग ही हम कदम 

होकर उसकी पदचाप 

से अपनी पदचाप 

मिला कर चलता है

वो अविराम चलता है 

मन ही तो कृष्ण है 

मन ही तो श्याम है

तब ही तो मन चंचल है 

तब ही तो मन अधीर है !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract