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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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मजदूर

मजदूर

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आओ आरंभ से आरंभ करते हैं

देखो बीच में रुक मत जाना

बिना सुने चले मत जाना

मानो तो मेरा जीवन कष्टों की किताब है

नहीं तो संघर्षों का दूसरा नाम है


गुरबत का मुझे एहसास नहीं

यह तो नासमझों से मिला मुझे एक नाम है

मजदूर हूं मैं मजबूर नहीं

दौलत ही मेरे हाथ है


सींचा है बंजर धरती को भी

मेहनत ही मेरा काम है

सबकी तकदीर बनाता आया

आओ आज तुम्हारी लकीरें बनाता हूं


श्रम का परिचय तुमसे करवा कर

वेदना को कुछ कम करता हूं

मैं खुद अपनी तकदीर बना कर

रोज नई इबारत लिख जाता हूं


तजुर्बों से जिंदगी सवार कर

अगली पीढ़ी को कुछ कदम आगे ले आता हूं

मेरी उड़ानों पर मुझे नाज है

मेरे परों पर भी मुझे विश्वास है।


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