मिट्टी को नमन
मिट्टी को नमन
जिस मिट्टी में गाथा है ब्रज के नंदन की,
जिस मिट्टी से मूरत बनी प्रभु वंदन की,
जिस मिट्टी में अंसख्य बीज लगाये,
जिस मिट्टी के पेड़ सदैव धरती बचाये,
उस मिट्टी को नमन!
जिस मिट्टी में जन्में अनेक शूर वीर,
जिस मिट्टी की माताओं ने बहाये नीर,
जिस मिट्टी में अवतरित हुए विभिन्न रुप भगवन,
जिस मिट्टी में सुदंर सुगंधित पुष्प महकाये चमन,
उस मिट्टी को नमन!
जिस देश की मिट्टी ने नहीं बाँटी धर्म-जाति,
जिस मिट्टी को पूजे जन जन मां की भांति,
जिस मिट्टी से जुड़ा हमारा गांव,शहर,स्वदेस,
जिस मिट्टी ने बांधा सभ्यता,संस्कृति से परदेस,
उस मिट्टी को नमन!
जिस मिट्टी को सपर्श करे गंगा की पवित्र धारा,
जिस मिट्टी के कण-कण में सराबोर हो भाईचारा,
जिस मिट्टी ने आयुर्वेदिक जड़ी -बूटी सरसाये,
जिस मिट्टी में श्रमिक किसानों ने अन्न उपजाये,
उस मिट्टी को नमन।
