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Rita Jha

Abstract Classics

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Rita Jha

Abstract Classics

मित्र

मित्र

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पाया है जीवन के सफर में अनेकों मित्र,

कुछ तो बहुत अच्छे निकले, कुछ विचित्र

कुछ ने साथ निभाया,कुछ ने मुंह फेरा

सच्चा मित्र एक, संग जुड़ा रिश्ता पवित्र।


मेरा सच्चा मित्र मेरा प्यारा हमसफ़र है,

जिसके संग तय कर रही जीवन सफर।

संग चलता है,सुख दुख में साथ निभाता,

मेरे राह के रोड़े हटा, सदा फूल बिखराता


मीलों दूर भी जब कभी वह मुझसे होता,

मेरे तकलीफ को बिन बताए जान लेता।

करे वहीं से फिर कुछ ऐसे सटीक उपाय,

फौरन मेरा मन मयूर खुशी से झूम उठता


न आज तक उसने कोई बात है छुपाई,

न कभी जीवन सफर में होने दी रुसवाई।

मेरा सच्चा सलाहकार, मेरा सच्चा साथी,

जिसके कंधे पर सवार हो जग से विदाई।


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