STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Abstract

4  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Abstract

मिथ्या अभिकथन राजनीति बंद

मिथ्या अभिकथन राजनीति बंद

1 min
173

हर तरफ तमतमाता तम है,

मिथ्या वादों में भ्रष्टाचारी तमंग है,

राजनीतिक अंधभक्त सोहर सा गाते हैं,

एक दिन हालात सभी के डगमगाते हैं,

सिंधु डोल उठेगा सूनामियां आयेगीं,

बन्धु बोल उठेगा क्रांतिया आयेंगी,

मेरे शब्द मेरा अभिदेश ग्रन्थ हैं,

यही मेरा अभिकर्तव्य यन्त्र है,

अभिक्रान्त की अभिक्रान्ति करो,

अभिकल्प करो अभिव्यक्ति बनो'

मिथ्या अभिकथन राजनीती बंद हो,

मिथ्या अभिकरण राजनीति बंद हो॥



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract