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Jassal Amarjit

Abstract

3  

Jassal Amarjit

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हर अक्स की पहचान होती है,

मगर दिखता कभी कभी , 

हर वक्त की पहचान होती है,

मगर रुकता कभी नहीं, 

हर शख्स में इक जान होती है, 

मगर समझता कोई नहीं ।।  



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