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Jassal Amarjit

Abstract


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Jassal Amarjit

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साया

साया

1 min 238 1 min 238

तेरा साया मुझको यूँ हैरान कर गया,

मैं नींद में सोया हुआ भी आहें भर रहा, 

इक चैन मेरा खो गया, सब जानते हुए, 

बस ठहर गयी ये जिंदगी, मैं आगे बढ़ गया। 

जिसके लिये हर रोज़, मैंने की मन्नते हज़ार

वो छुप रहा आगोश में छिप जाय बार बार, 

तुम कोन सी मंजिल पे मुझको छोड़ आए अब

मैं तब भी तेरे साथ था अब भी तेरे साथ, 

तुम मेरी मुहबत का गुरूर हो ये जानता है रब। 



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