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नम्रता सिंह नमी

Abstract

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नम्रता सिंह नमी

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मिल लो न खुद से

मिल लो न खुद से

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हो सके तो कर लो

समय का सदुपयोग

कोशिश करो न

अपने अंदर जाने की

मिलो खुद से

और संवारो खुद को


कर दो खुद को समर्पित

और

पुनः सृजन करो एक नए मैं का

जो हो पहले से

सौम्य

करुणामयी

और


ईश के करीब

और पा लो

सुखद अहसास का वो

अप्रतिम पल

जो फिर भीड़ में

कभी न पाओगे

तो फिर कर लो न


एक कोशिश

और पा लो

खुद को

खुद के लिए

जी लो खुद के लिए

हाँ भर लो अपना आँचल


प्यार प्यार और ढेरों प्यार से

रंग बिरंगे सपनो से

सात सुरों की धुन से


और मिल लो न

ईश्वर की उस अनुपम कृति से

हाँ

मिल लो न

स्वयं से।


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