Shamim Shaikh
Inspirational
आज है देश के बापू की जन्म तिथि
जिस महा पुरुष ने लाया देश में जागृति
कर लो चाँद फ़...
जन्म दिन मुबा...
परिश्रम ही पू...
बचपन का सफ़र!
मुकम्मल मौत
ईद आने वाली ह...
हॅपी बर्थ-डे ...
वन्दे मातरम!
मुझे आता है बस अभिनय करना रिश्तों के चरित्र में ढलकर… बँट जाना घर के कमरों की तरह जिस कमरे में जाओ उ... मुझे आता है बस अभिनय करना रिश्तों के चरित्र में ढलकर… बँट जाना घर के कमरों की तर...
एक अजीब सी पागल है एक अजीब सी पागल है
उन खुशियों को जिनके पास कुछ ना होते हुए भी उनकी खिलखिलाहट बादलों से परे है। उन खुशियों को जिनके पास कुछ ना होते हुए भी उनकी खिलखिलाहट बादलों से परे ...
भोर - सी आस...। भोर - सी आस...।
ज़रा से प्यार को भी बहुत समझो और सामने वाले से मिली उपेक्षा को भी मत सहो ज़रा से प्यार को भी बहुत समझो और सामने वाले से मिली उपेक्षा को भी मत सहो
गाने बन गए, मूवी बन गई; कितने सरकारी, उससे भी ज्यादा गैर-सरकारी प्रोजेक्ट बन गए... गाने बन गए, मूवी बन गई; कितने सरकारी, उससे भी ज्यादा गैर-सरकारी प्रोजेक्ट बन गए...
नवलेखकों का अंग्रेजी के तरफ बढ़ता प्रेम मान्य है परंतु हिंदी से प्रेम ना कर पाना उचित नहीं । - विद्रो... नवलेखकों का अंग्रेजी के तरफ बढ़ता प्रेम मान्य है परंतु हिंदी से प्रेम ना कर पाना ...
वे तो उठाते रहेंगे उंगलियां हर रोज नई उंगलियां...... वे तो उठाते रहेंगे उंगलियां हर रोज नई उंगलियां......
प्रसन्नचित्त,परमानंद में लिप्त, बावरा-सा मन लिए फूल हूं मैं। प्रसन्नचित्त,परमानंद में लिप्त, बावरा-सा मन लिए फूल हूं मैं।
कर सकूँ कुछ ऐसा...। कर सकूँ कुछ ऐसा...।
जिससे मिले किसी को प्ररेणा वो सच मे है, असल कविता, शब्द। जिससे मिले किसी को प्ररेणा वो सच मे है, असल कविता, शब्द।
ऐसा प्रेम मधुर हो जिसको, याद करे यह दुनिया सारी। ऐसा प्रेम मधुर हो जिसको, याद करे यह दुनिया सारी।
भावों को शब्दों में भरकरपन्नों पर बिखराते हैं जोबंजर मन में नेह-सुमन कीनूतन पौध लगाते हैं जो भावों को शब्दों में भरकरपन्नों पर बिखराते हैं जोबंजर मन में नेह-सुमन कीनूतन पौध ...
समाज की जलती सोच का आलिंगन कर, मैं चल पड़ा हूँ बेफिक्र, इस जीवन पथ पर। समाज की जलती सोच का आलिंगन कर, मैं चल पड़ा हूँ बेफिक्र, इस जीवन पथ पर।
क्या करता हूँ मैं अपने अंदर के खालीपन के साथ ? जानने के लिए पढ़िए यह कविता...। क्या करता हूँ मैं अपने अंदर के खालीपन के साथ ? जानने के लिए पढ़िए यह कविता...।
जीवन...। जीवन...।
पहिये की भांति वक्त, चलता रहता है, झुकाता है जग को,स्वयं नहीं झुकता है। पहिये की भांति वक्त, चलता रहता है, झुकाता है जग को,स्वयं नहीं झुकता है।
भारत के वीर सपूत,देश हित जान गंवाई अपनी जान दी कभी गर्दन नहीं झुकाई। भारत के वीर सपूत,देश हित जान गंवाई अपनी जान दी कभी गर्दन नहीं झुकाई।
मुझे विद्युत संचालित दाह गया गृह में जला आना इस प्रकार बचा लेना एक वृक्ष। मुझे विद्युत संचालित दाह गया गृह में जला आना इस प्रकार बचा लेना एक वृक्ष।
मां बाप का पूजन करें हम श्रद्धा के साथ इसी तरह से पेड़ को सींचे अपने हाथ। मां बाप का पूजन करें हम श्रद्धा के साथ इसी तरह से पेड़ को सींचे अपने हाथ।