ananya rai
Fantasy
काम का नाश करके जरा देखिये
प्रभु पे विश्वास करके जरा देखिये
शिव सती आपके घर भी आयेंगे पर
मन को कैलाश करके जरा देखिये।।
संसार की जतन ...
फिर तुझे वो य...
मन
सुहानी शाम
विश्व माली
कहां जा रहे ह...
मेरे राम जी
दिल ने ये कहा...
ये ना पूछो कै...
अब तू बन बैठी है माँ मेरी, मेरी परियों सी रानी। अब तू बन बैठी है माँ मेरी, मेरी परियों सी रानी।
समेट लेती है सांसे, ग़मों को मेरे सभी.. रखती है सब्र हिज्र में, ना कुफ्र सा काज करती समेट लेती है सांसे, ग़मों को मेरे सभी.. रखती है सब्र हिज्र में, ना कुफ्र सा...
जैसे आसमान पर तारों का कोई ताज जड़ा है टीचर जी कहती थी इसमें एक दिन एलियन आएंगे। जैसे आसमान पर तारों का कोई ताज जड़ा है टीचर जी कहती थी इसमें एक दिन ...
देकर अपनी चाहत का नज़राना.. अल्फाजों को मेरे, वो गुनगुनाने लगे. देकर अपनी चाहत का नज़राना.. अल्फाजों को मेरे, वो गुनगुनाने लगे.
प्रेम भी एक बार मिथ्या हो जाए तुम्हारे सामने आख़िर तुम ब्रह्म ज्ञान सी अद्वितीय आराधना प्रेम भी एक बार मिथ्या हो जाए तुम्हारे सामने आख़िर तुम ब्रह्म ज्ञान सी अद्वित...
आशिकी को अब किसी कांधे की जरूरत क्या है गली गली में हर कोई लैला तो कोई मजनूँ निकला आशिकी को अब किसी कांधे की जरूरत क्या है गली गली में हर कोई लैला तो कोई मजनूँ...
शब्दों का शहर हर तरफ पहरेदार शब्दों का शहर हर तरफ पहरेदार
वह अपने हार्नेस को एक हिला देता है यह पूछने के लिए कि क्या कुछ गलती है। वह अपने हार्नेस को एक हिला देता है यह पूछने के लिए कि क्या कुछ गलती है।
मगर सामने खड़े को नहीं अजीब खेल है नैनों का मगर सामने खड़े को नहीं अजीब खेल है नैनों का
नवरस तो नवराज हैं स्वयं गुणों की खान हैं नवरस तो नवराज हैं स्वयं गुणों की खान हैं
तेरी याद में जब नींद नहीं आती करवटों को सुलाकर चाँद को निहारूं तेरी याद में जब नींद नहीं आती करवटों को सुलाकर चाँद को निहारूं
थोड़ा रूठूँ , थोड़ा रो लूँ थोड़ा सा हँसता हुआ मनुहार चाहती हूँ थोड़ा रूठूँ , थोड़ा रो लूँ थोड़ा सा हँसता हुआ मनुहार चाहती हूँ
भांति भांति के परिंदे हैं रंग सब पर अलग चितेरा है। भांति भांति के परिंदे हैं रंग सब पर अलग चितेरा है।
तुम देखते कहाँ हो ? तुम बस भटकते रहते हो ! दिशाहीन तुम देखते कहाँ हो ? तुम बस भटकते रहते हो ! दिशाहीन
सोचो, गर ऐसा हो पाता धरती उग पाती आंगन के गमलों में। सोचो, गर ऐसा हो पाता धरती उग पाती आंगन के गमलों में।
प्रेम जगत का सार और कछु सार नहीं है उद्धव ज्ञान कर्म का सत्य। प्रेम जगत का सार और कछु सार नहीं है उद्धव ज्ञान कर्म का सत्य।
तुझपे भरोसा करने वाले की जिंदगी में ये इम्तिहान की घड़ी क्यों आती है ? तुझपे भरोसा करने वाले की जिंदगी में ये इम्तिहान की घड़ी क्यों आती है ?
फिर भी देखो देख भाल के साथी चुनना नहीं मना है फिर भी देखो देख भाल के साथी चुनना नहीं मना है
मुमकिन है तुमको कोई और मिल गया होगा यहाँ मौसम को आज भी सिर्फ़ तुम्हारा इंतज़ार है मुमकिन है तुमको कोई और मिल गया होगा यहाँ मौसम को आज भी सिर्फ़ तुम्हारा इंतज़ार...
कभी उम्मीदों में पनपते एक आस पर मुस्काते रिश्ते, कभी उम्मीदों में पनपते एक आस पर मुस्काते रिश्ते,