महा शिवरात्री की कथा
महा शिवरात्री की कथा
सुन अपमान पति का स्ति ने अग्नि में प्राण गवाए थे
ब्रह्मा, विष्णु देख रहे थे, तीनो लोक थर्राए थे
क्रोध में तांडव नृतन हुआ, चढ़ा शिव का पारा था
कैसी अनहोनी हो रही देख रहा जग सारा था
अपने क्रोध से उतपन्न वीरभद्र को भेजा वहां
प्रजापति दक्ष ने यज्ञ रचाया था जहां
प्रवेश हुआ वीरभद्र का, विचलित हुए राजा रानी
मन ही मन सब सोच रहे क्या अनर्थ किया तुमने भवानी
वीरभद्र ने प्रजापति की गर्दन को काटा तब
क्रोध भरी हुंकार करी, दो हिस्सों में दक्ष को बाटा तब
शिव से करी सबने पुकार, शिवजी को मनाया जब
बकरे का शीश शिवजी ने दक्ष को लगाया तब
पर उठा सती शरीर को शिव तीनो लोको में विचरण करने लागे
देख दशा त्रिलोक पति की ब्रह्मा विष्णु डरने लागे
चक्र सुदर्शन से विष्णु ने किया सती शरीर पर प्रहार
जहाँ अंग गिरे, वहाँ बने शक्तिपीठ जिनकी महिमा अपार
शिव ने सब त्याग दिया,गृहस्थ आश्रम से नाता तोड़ा
बनकर वैरागी बैठे गुफा में, नृत्य, गायन सब छोड़ा
सब देवो ने फिर करी पुकार, रक्षो करो जगदम्ब भवानी
तुम ही हमारी आस हो हे माँ आदिशक्ति महारानी
पृथ्वी पर ताड़कासुर ने तप किया विकराल
ब्रह्मा से वर मांगा शिव पुत्र बने मेरा काल
पाकर ब्रह्मा जी से यह वरदान
अपने आप को अमर समझ रहा वो पापी शैतान
दुख अब चारो और फैला पर मंगल वेला आई है
दुख के बादल छट गए, राजा हिमालय घर बजी बधाई है
आदिशक्ति ने मां पार्वती का रूप किया धारण
जन्म उत्सव हुआ, बजने लगा मंगल गायन
देवऋषि नारद ने पिछले जन्म का वृतांत सुनाया
शिव घर जाएगी, राजा - रानी को समझाया
बचपन से ही पार्वती ने शिव को पति मान लिया
राज पाठ सब त्यागा, मन से आशुतोष का ध्यान किया
करने लगी तप व्व शिव को पति पाने को
आए खुद शंकर पार्वती की भक्ति आजमाने को
कहने लगे शिव निर्धन, उससे क्यो ब्याह रचाएगी
राजा की पुत्री होकर निर्धन के घर जाएगी
माँ पार्वती ने शिव की बातों को नकार दिया
कहा मैंने मन ही मन शिव को अपना पति स्वीकार किया
शिव की परीक्षा को शक्ति ने पर किया
मंगल घड़ी आई है, शिव ने शक्ति को स्वीकार किया
शिव शक्ति का विवाह हुआ, तीन लोक हरषाए है
देवी - देवता मंगल गाये, यक्ष फूल बरसाए है
विवाह हुआ सबसे अनोखा , भूत प्रेत बाराती है
देव असुर सब जा रहे, शिव सबके साथी है
विवाह हुआ, आई माँ पार्वती कैलाश मे
खुशियों का नज़ारा देखो, धूम मची आकाश मे
दोनो के संयोग से पुत्र हुआ, कार्तिकेय हो गया नाम
देवताओ के सेनापति बने, झुक झुक सबने करा प्रणाम
ताड़कासुर को मारा कार्तिके ने, देवो को भयमुक्त किया
जन्म हुआ शिव के पुत्र का, ब्रह्मा वर साकार किया
महा शिवरात्रि की कथा, आज सुनाई है
आप सभी को महा शिवरात्री की ढेरों बधाई है।
