महा निकेतन
महा निकेतन
सुगठित कोमल संबंधों का सच्चा नौका है ,
खेने वाला खुशहाली से पार कराता है ।
लाड प्यार से नेह दया से आगे बढ जाते
परिवार ऐेसे शुद्ध जनों का महा निकेतन है।
ईंट सिमेंट और पत्थर लेकर मकान बनाते है
बेजान संरचना है इसकी आवाज़ नहीं है।
मधुर मनोहर रिश्ता सिलकर घर बनाते है ,
आत्म प्रेम को बोकर उज्वल पेड सजाते है।
काले दिन में कुटुम्ब से सब सहारा मिलते हैं
जीने का यह बेहत्तर का तरीका होता है।
अपने सारे विकास का पथ दर्शन देता है
जिंदगी का हौसला बढ मुसकान रहता है।
जयगान गाकर आगे बढने ज्ञान भी मिलते .
सौहार्द सदा भेद भाव तो कभी नहीं होते
प्रिय लोगों के ख्यल भावना रोज़ है उठती
एकता व सम्मान का भी बोध हो जाते।
