मेरी प्यारी बेटी
मेरी प्यारी बेटी
सुबह की खिली धूप सी है तू,
नटखट है चंचल है जरा सी वाचाल भी
कभी माँ बन जाती तो कभी सहेली,
कभी रहती पहेली सी।
उछलकूद मचाती करती फिरती शरारतें,
शरारतों पर फिर डांट खाकर बैठ जाती
मुंह फुलाकर,फिर झट से ही मान भी जाती ।
अच्छी शिक्षा तुझे देकर तुझे
सफल इंसान बनाना है,
मेरी प्यारी बच्ची तुझे महफ़ूज भी रखना है।
मेरे नाम से तुम हो जानी जाती
पर तुम्हारा खुद का नाम बने,
इतनी बस इस माँ की दुआ है
कि तू देश की शान बने।
