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Dr.rajmati Surana

Abstract

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Dr.rajmati Surana

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मेरी ऑखों को मिली सजा

मेरी ऑखों को मिली सजा

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मेरी आँखों को मिली सजा आज रात तेरे ख़ातिर, 

ख्वाबों में दीदार की तमन्ना में रोते रहे तेरे ख़ातिर।


आदत नहीं थी किसी से मोहब्बत करने की हमारी, 

जुर्म-ए-मोहब्बत मे मिली सजा बेकरार रहे तेरे ख़ातिर।


सजा बन गई है जिदंगी मोहब्बत में हमारी रूसवा हो,

जुर्म तुम से भी हुआ, मुझे ही क्यूँ मिली सजा तेरे ख़ातिर।


अब न तुम्हें याद करेंगे ना कभी प्यार से आवाज़ देंगे, 

हर बार उम्मीद रखता है दिल फिर टूटता है तेरे ख़ातिर 


जहान में एक ही शख्स था जिसने "राज" का चैन लूटा,

वफा में लाजमी था अश्कों का बहना दिन-रात तेरे ख़ातिर।


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