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nits Shelani

Abstract

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nits Shelani

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मेरी खता

मेरी खता

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कैसे समझाऊँ मैं खुद को, ए खुदा।

उसे मना किया,उसमेँ मेरी क्या खता।

ऐसे ही किसी से प्यार नही होता।

और जिससे प्यार होता है,उसे ही नहीं पता।



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