STORYMIRROR

nits Shelani

Abstract

2  

nits Shelani

Abstract

मेरी खता

मेरी खता

1 min
130

कैसे समझाऊँ मैं खुद को, ए खुदा।

उसे मना किया,उसमेँ मेरी क्या खता।

ऐसे ही किसी से प्यार नही होता।

और जिससे प्यार होता है,उसे ही नहीं पता।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract